Bihar Politics : देश रक्षाबंधन का त्यौहार मना रहा है…हालांकि मैं त्यौहारों को लेकर मेरी राय आम नहीं है.खैर…ये लेख त्यौहारों को लेकर मेरी राय के लिए नहीं है.रक्षाबंधन को लेकर कहा जाता है कि यह एक ऐसा पर्व है जो भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और संरक्षण की डोर को और मजबूत करता है. लेकिन अब रिश्ते सोशल मीडिया या फिर जरूरत तक ही सीमित रह गई है…
नतीजा हम और आप ऐसे मौके पर सोशल मीडिया खंगालने में लग जाते हैं. किसने क्या कहा…किसके साथ है…आदि… और हमेशा की तरह इस खास मौके पर भी कैमरे की नजर बड़े चेहरों को ढूंढने में लग जाती है…और इस बार मेरी नजर अटक गई बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार के राखी त्यौहार पर जहां मैंने देखा कि एक तरफ जहां चुनावी राज्य बिहार में इस बार राखी का यह पर्व कई मायनों में खास रहा…तो दूसरे तरफ राजनीति के बड़े घराने में यह डोर कुछ ढीली होती दिखी. राजनीतिक मतभेद और पारिवारिक खटास का असर इस उत्सव पर साफ नजर आ रहा था…
बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार की राजनीति और रिश्तों में जो सियासी गिरह लगी हुई थी उसके कमजोर होते ही सब कुछ बिखर सा गया है और यह राखी के इस त्यौहार भी नजर भी आया. वैसे भी सोशल मीडिया का यह दौर कुछ भी पर्दे में कहा रहने देता है.तेज प्रताप यादव जो लालू प्रसाद यादव परिवार के बड़े बेटे है,आज परिवार की राखी की तस्वीरों से लगभग गायब रहे. सोशल मीडिया पर उन्होंने अपनी चार बहनें,हेमा, रागिनी, चंदा और अनुष्का भेजे राखियों के लिए आभार जताया र मौसेरी बहन डॉ. पिंकी से राखी बंधवाने की तस्वीरें साझा की.
मगर इस परिवार की सबसे चर्चित बहन,सांसद मीसा भारती के साथ उनकी कोई तस्वीर या जिक्र नहीं दिखा. जबकि दिल्ली में मीसा भारती ने छोटे भाई और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को राखी बांधी. वहीं बहन रोहिणी आचार्या ने संस्कृत में लिखा कि बन्धुः स्नेहेन मनो बध्नाति य मतलब कि जो स्नेह से मन को बांधे, वही भाई है. हालांकि उनके पोस्ट में भी तेजप्रताप का ज़िक्र नहीं था.
उधर तेजस्वी यादव ने राखी की शुभकामनाओं के साथ अपनी राजनीतिक अपील भी जोड़ दी और बिहार की बहनों से राखी के साथ साथ और वोट भी मांग लिया.नीतीश कुमार और चिराग पासवान ने भी बहनों संग राखी का रंग जमाया. लेकिन तेजप्रताप के इर्द-गिर्द माहौल उतना ही सूना रहा जितना निष्कासन के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता शोर मचा रही है.